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Wednesday, 21 September 2016

फिर बसंत आना है - Motivational Poem by Dr. Kumar Vishwas

दोस्तों पूर्व में हमने Dr Kumar Vishwas की प्रेरणादायक Motivational शायरियां पढी थी। मेरी उस पोस्ट को आप सभी का बहुत प्यार मिला। यह पोस्ट विचार प्रेरणा ब्लाॅग की सबसे बड़ी Hit!!! पोस्ट साबित हुई है। मुझे इस बात की खुशी है। 

डाॅ कुमार विश्वास की रचनाधर्मिता के प्रति आपकी रूचि को देखते हुए मैं उनकी एक कविता लेकर आया हूं, यह कविता मुझे बहुत प्रिय है और मुझे विश्वास है कि यह कविता आपको भी उतनी ही पसंद आएगी। 

डाॅ कुमार विश्वास की इस कविता में एक आस जगाई गई है जो किसी भी हारे हुए मन को पुनः ऊर्जास्वित करने में Completely Helpful है। साथ ही यह भी बताया गया है कि Success की सीढियों पर चढते चढते कैसी बाधाएं आपके पथ में आएंगी और आपकों किस तरह उन्हें Treat करना है। तो लीजिए यह Hindi Poem आपके लिए-


शीर्षक- फिर बसंत आना है


तूफ़ानी लहरें हों
अम्बर के पहरे हों
पुरवा के दामन पर दाग़ बहुत गहरे हों
सागर के माँझी मत मन को तू हारना
जीवन के क्रम में जो खोया है, पाना है
Ram Lakhara Vipulपतझर का मतलब है फिर बसंत आना है 

राजवंश रूठे तो
राजमुकुट टूटे तो
सीतापति.राघव से राजमहल छूटे तो
आशा मत हार, पार सागर के एक बार
पत्थर में प्राण फूँक, सेतु फिर बनाना है
पतझर का मतलब है फिर बसंत आना है 

घर भर चाहे छोड़े
सूरज भी मुँह मोड़े
विदुर रहे मौन, छिने राज्य, स्वर्णरथ, घोड़े
माँ का बस प्यार, सार गीता का साथ रहे
पंचतत्व सौ पर है भारी, बतलाना है
जीवन का राजसूय यज्ञ फिर कराना है
पतझर का मतलब है, फिर बसंत आना है - Dr. Kumar Vishwas कुमार विश्वास


तो दोस्तों कैसी लगी यह कविता? पिछली बार की डाॅ कुमार विश्वास की प्रेरणादायी शायरी Post की तरह इस बार भी मुझे अपने Comments के माध्यम से जरूर बताएं। मुझे इंतजार रहेगा।

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Wednesday, 7 September 2016

ऊपर चढना है तो झुकना पड़ेगा | Prerna dayak Hindi Kahani


राजस्थान का एक कस्बा है सिवाना। यह धार्मिक नगरी होने के साथ साथ पर्वतीय इलाका है।

उसी कस्बे में मनोहर नाम का एक विद्वान व्यक्ति रहता था। मनोहर कोई एलएलबी, बीए, एमए, एमबीए नहीं था, उसने जीवनं की पाठशाला से अनुभव की वर्णमाला सीखी थी। मनोहर की उम्र 55 वर्ष थी और उसका एक 21 वर्षीय बेटा था विकास।
विकास को भगवान का एक गिफ्ट मिला हुआ था- आवाज।

उसकी आवाज इतनी मधुर थी कि पिछले दो वर्षों में ही उसने अपने आसपास के लोगो के दिलों में गहरी जगह बना ली थी। विकास की गायिकी का नशा दिन ब दिन लोगों के दिलों पर छाता जा रहा था लेकिन इसके साथ एक और चीज बढ रही थी वह था विकास का घमंड।

विकास जिस तेजी से सफलता पर पहुंचा उसकी दुगुनी तेजी से नीचे धरातल पर आ गया। विकास के रवैये ने अपने साथ काम करने वाले लोगों का भरोसा खो दिया था।
Prernadayak vichar


अचानक से विफलता ने विकास को काफी हद तक निराश कर दिया था। विकास अपनी नाकामियों की वजह नहीं ढूंढ पा रहा था। उसे यह पता नहीं चल रहा था कि आखिर क्या गलत हो रहा है।

विकास की इस उदासी को उसके पिता मनोहर ने समझा।

एक दिन मनोहर अपने बेटे विकास को एक पहाड़ के पास ले गया और विकास को पहाड़ पर अपने साथ चढने के लिए कहा।

मनोहर और विकास दोनो पिता पुत्र पहाड़ पर चढने लगे। पहाड़ पर चढाई करने के लिए विकास ने अपने आप को झुका लिया और तेजी से ऊपर की ओर चढने लगा।

आधी दूरी तय करने के बाद मनोहर ने अपने बेटे विकास को रोका और कहा कि 'आधी दूरी तो तुम झुक कर चले हो, अब अगली आधी दूरी तक तुम अपने शरीर को तान कर चलो। झुकना बिल्कुल मत।'

विकास ने अपने पिता के कहे अनुसार चढना शुरू किया लेकिन उसे शरीर तान कर चलने में परेशानी होने लगी।
दो तीन कदम बढाते ही वह पीछे की ओर गिरने लगा।

मनोहर ने विकास का हाथ पकड़ा और गिरने से बचा लिया।

विकास ने अपने पिता से कहा कि 'शरीर को तान कर वह ऊपर की ओर नहीं चढ पाएगा, झुक कर ही इस पहाड़ की चढाई संभव है। '

इतना कहते ही मनोहर ने अपने बेटे विकास का हाथ पकड़ा और कहा कि 'विकास! जीवन ऐसा ही है।'

अगर तुम्हें सफलता के पहाड़ पर चढना है तो झुक कर चढना होगा न कि तन कर। यह तुम्हारे लिए सीख है।

तुम सोचते हो न कि मैं क्यों इतनी जल्दी असफल हो गया? इसका कारण यही है कि तुम में अहंकार आ गया था। तुम इसे अपनी व्यक्तिगत कामयाबी मानकर मन ही मन तन कर खड़े थे जबकि तुम्हें झुकना था। सफलता के पहाड़ पर चढते समय भी झुक कर चढना पड़ता है। झुकने का मतलब अपने आपको सौम्य, अनुशासित और कृतज्ञ बनाए रखना। 
किसी भी व्यक्ति की सफलता उसकी व्यक्तिगत सफलता नहीं होती, उसके कुछ सहयोगी कारक होते है। तुम्हें उन लोगों के प्रति हमेंशा कृतज्ञ और सरल रहना होगा जिनकी बदौलत तुम सफलता के शिखर की ओर बढ रहे हो।
याद रहे जो झुक कर चल रहा है इसका अर्थ है कि वह ऊपर चढ रहा है और जो तन कर चल रहा है इसका मतलब कि वह जल्दी ही नीचे गिरने वाला है।

विकास अपने पिता की बात समझ गया था, उसे अपनी नाकामयाबी की असली वजह पता चल गई थी।

दोस्तों यह सीख हम सबके लिए भी है। हम अपनी कामयाबी से इतने प्रसन्न हो जाते है कि हम इसे अपने व्यक्तिगत प्रयासों का परिणाम मानते है जबकि किसी भी व्यक्ति की सफलता में उसके कुछ सहयोगी भी होते है। मान लीजिए कोई गायक है और वह प्रसिद्ध है तो उस गायक के साथ उन तबला वादकों, ढोलक वादकों, गीतकारों, श्रोताओं आदि का सहयोग रहा है तभी वह इतना आगे बढ सका है। कोई भी बाॅलीवुड एक्टर बड़ा तब होता है जब उसकी फिल्म हिट हो, लेकिन फिल्म हिट कौन करवाता है स्क्रिप्ट राईटर, निर्देशक, प्रोड्युसर, गीतकार, स्पाॅट ब्वाॅय, संगीतज्ञ और सबसे बड़े दर्शक आदि आदि।


इसलिए हम आगे बढना चाहते है या फिर आगे बढ रहे है तो सबसे पहले हमें अपने आस पास के लोगों और चीजों के प्रति कृतज्ञ (किसी का उपकार मानना और जताना) हो ना पड़ेगा। मैं तो अपने पेन, कम्प्यूटर, खिड़की, कागज, शरीर तक को कृतज्ञता दर्शाता हूं।

तो दोस्तों कैसी लगी ये Story!!! है ना वास्तव में Inspirational और Helpful! Inspirational Articles, Poems and Quotes के साथ साथ ऐसी ही Inspirational Stories मैं आपके लिए लाता रहूंगा। बस अपने Valuable Comments के माध्यम से मुझे जरूर बताईएगा कि यह पोस्ट आपकों कैसी लगी? मुझे इंतजार रहेगा........

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Sunday, 31 July 2016

शेर की जंग और Leadership के 9 सबक

Hiii Friends!!

Stories हमें बहुत कुछ सिखाती है। हर कहानी का अपना lesson होता है। 

आज मैं आपके लिए एक कहानी Cum लेख लेकर आया हूं। यह Story क्या सिखाती है? यह आपकों पूरी कहानी पढने के बाद जरूर पता चल जाएगा। 

तो चलिए शुरू करते है-

हिमाचल के पहाड़ों में एक घना जंगल था। उस जंगल का राजा एक शेर था। शेर अपनी पत्नी शेरनी और दो शावकों के साथ जंगल में रहकर राज करता था। शेर के राज में पूरे जंगल में मंगल था। जंगल के सभी प्राणी खुशी खुशी और निर्भय होकर विचरण करते थे। अपने बलशाली राजा शेर के संरक्षण में उन्हें कोई भय नहीं था, जंगल  में प्रवेश करने वाले किसी भी दूसरे शक्तिशाली और खूंखार जानवर को शेर पटखनी देकर मार डालता था। 
राजा शेर का पूरा मंत्रिमंडल था जिसमें भालू, जिराफ, तेंदुआ, हाथी, बाघ से लेकर खरगोश तक के जानवर शामिल थे। 
एक बार जंगल में कुछ शिकारियों ने प्रवेश किया। शिकारियों को यह खबर थी कि जंगल में शेर और उसका परिवार है जिनकों मारकर उनकी खाल से खूब माल कमाया जा सकता है।

जंगल में शिकारियों के प्रवेश की सूचना गुप्तचर सियार ने राजा शेर को दी। 

शिकारी दल के प्रवेश की खबर सुनकर महामंत्री भालू ने राजा शेर को परिवार सहित कुछ दिनों के लिए पहाड़ की चोटी पर बनी गुफा में जाने की सलाह दी और कहा कि उन शिकारियों के झुंड से हम सब निपट लेंगे।

अपने महामंत्री के मुख से ऐसी बाते सुनकर शेर ने असहमति में सिर हिलाते हुए कह दिया कि शिकारियों के झुंड से वह खुद निपटेगा। शेर को आगे बढता देखकर पूरे मंत्रिमंडल और जंगल वासियों में अद्भुत हौंसला आ गया।

सेनापति बाघ ने राजा शेर को सलाह दी कि शिकारी जंगल में घुसे उससे पहले ही हम उन पर हमला कर देते है, जिससे वे लोग भाग जाएंगे। शेर को यह सलाह पसंद नहीं आई, वह किसी जल्दबाजी में नहीं था। फिर भी बाघ की सलाह को मानते हुए उसमें जरूरी सुधार के साथ शेर ने कहा कि हम हमला करेंगे लेकिन अभी नहीं, थोड़ी देर बाद पूरे योजनाबद्ध तरीके से।
Ram Lakhara Vipul

शेर ने अपने मंत्रियों के साथ गुप्त मंत्रणा की, शिकारियों से निपटने के तरीकों पर सबकी सलाह को ध्यान से सुना। अंत में शेर ने सबकी सलाह को उत्कृष्ट बताते हुए पूरी योजना को सबके सामने प्रस्तुत किया। शेर की योजना सुनकर पूरा मंत्रिमंडल उनसे सहमत हो गया।

अपनी योजना के अनुसार शेर ने पहली चाल चली, जंगल की सभी मधुमक्खियों को उसने बुलावा भेजा। 

कुछ ही देर में जंगल की सारी मधुमक्खियां इकट्ठी हो गई। शेर ने उनकों शिकारियों के झुंड को घायल करने का आदेश दिया। अपने राजा का आदेश पाकर मधुमक्खियों का दल शिकारियों पर टूट पड़ा। अचानक हुए हमले से शिकारी इधर उधर भागने लगे। मधुमक्खियों के काटने से शिकारी घायल हो गए थे। 

मधुमक्खियों से बचने के लिए शिकारियेां के दिमाग में एक उपाय सूझा। 

वे सब पानी के तालाब की ओर भागे, जिसमें डूबकी लगाकर वे उनसे तुरंत रूप से बच सके। तालाब से कुछ दूरी पर ही शिकारियेां के पांव अचानक ठिठक गए, उन्होंने देखा कि बहुत सारे मगरमच्छ तालाब के किनारे पर इधर उधर घूम रहे थे। 

अपने आंखों के सामने मौत खड़ी देखकर शिकारी उल्टे पांव वापस भागे। लेकिन तब तक मधुमक्खियेां ने उन्हें काफी घायल कर दिया था, आंखो पर काटने से सबकी आंखे सूज गई थी। शिकारियों ने शिकार की इच्छा छोड़कर वापस सही सलामत घर लौटने में भलाई समझी। 

लेकिन तभी बीच में शेर की सेना ने बाघ की अगुवाई में हमला बोल दिया। 

आंखों में दर्द और थकान की वजह से वे ज्यादा भाग नहीं सके और सभी शिकारी खुद ही शेर की सेना का शिकार हो गए। 

अपने राजा शेर की सूझबूझ से पूरा जंगल बच गया था, सभी ने अपने राजा की शान में जयकार की।

यह कहानी इतनी ही नहीं है। इसके भीतर ऐसे कई बिंदु आ गए है जिन्हें शायद हम पढते समय नजरअंदाज कर गए होंगे। यह कहानी नेतृत्व कैसे किया जाता है यह दर्शाती है। इस कहानी से नेतृत्व संबंधी क्या सीखा जा सकता है इसके बिंदुओं पर एक बार गौर करते है-

1. संयम और निस्स्वार्थता -  


सबसे पहली बात यह कि शेर खुद मांसाहारी होते हुए भी उसके राज में सभी जानवर खुशी से रहते थे। इसका मतलब यह तो कभी नहीं होगा कि शेर का पूरा परिवार शाकाहारी होगा। यह सच है कि शेर ने अपने परिवार के भोजन के लिए जानवरों का शिकार किया होगा लेकिन जरूरत के मुताबिक। जिससे पूरे जंगल ने शेर की जरूरत को समझा। इसी प्रकार एक नेता की जरूरते उसके अनुयायी समझते है लेकिन तब तक ही जब तक नेता का आचरण संयमित हो।

2. किसी भी Problem में खुद को आगे रखना - 


किसी भी बाहरी खूंखार जानवर से राजा शेर खुद भिड़ता था। किसी भी समस्या से खुद जाकर पहले रूबरू होना एक सच्चे नेता की निशानी है।

3. Simplicity और आगे बढकर चुनौती लेना- 


जंगल में शिकारियेां के प्रवेश पर अपने महामंत्री की जंगल छोड़कर गुफा में जाने की सलाह को राजा ने विनम्रता पूर्वक नहीं माना, बल्कि खुद उनसे लड़ने का निश्चय किया। संकट के समय मैदान नहीं छोड़ने का गुण किसी भी नेता की स्वीकार्यता को और बढा देता है। 

4. जल्दबाजी से काम न लेना - 


अपने सेनापति बाघ की तुरंत हमला कर देने की सलाह को शेर ने अस्वीकार कर दिया। किसी भी विपत्ति के आने पर बिना योजना के उससे दो चार होना अधिकांश रूप से असफलता का कारण बनता है

5. सबका विश्वास प्राप्त कर Successful Plan बनाना - 


बाघ की सलाह को न मानने के बाद भी बाघ की सलाह और अन्य जानवरों की सलाह को सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर उसमें फेरबदल के साथ अपनी योजना बनायी।
सुनो सबकी करो मन की!! एक नेता को चाहिए कि वह सबकी सलाह को सुने, उस सलाह का मान करे और आवश्यकतानुसार उसमें Correction कर अपनी योजना बनाए साथ ही उस योजना को प्रस्तुत करते समय यह दर्शाने की पुरजोर कोशिश करे कि सबकी सलाह से ही ऐसी उत्कृष्ट योजना बन पाई है। इससे अपने अनुयायियों की नजरों में Leader का कद बढता ही है।

(Read- कैसे प्राप्त करे लक्ष्य? How to achieve goal in hindi )

6. अपने हितैषियों (Well Wishers) की चिंता करना - 


शेर ने तुरंत अपनी सेना को न भेजकर मधुमक्खियों को पहले भेजा। क्योंकि एक नेता के तौर पर शेर अपने किसी प्रिय को नहीं खोना चाहते थे। (Read - दूसरों का ख्याल रखों - वह आपका हो जाएगा) शेर को भलीभांति पता था कि शिकारियों के पास बंदूके थी, यदि पहला हमला जानवर करेंगे तो हो सकता है कि शिकारियों की गोली से कई जानवर मर जाए।
इसलिए शेर ने उत्कृष्ट उपाय सोचते हुए मधुमक्खियों को पहले हमला करने के लिए कहा, शेर को पता था कि मधुमक्खियों से निपटने के लिए शिकारियों के पास कोई हथियार नहीं होगा।

7. दूरदर्शिता- 


तालाब के किनारों पर मगरमच्छों का घूमना भी शेर की योजना का हिस्सा था। शेर ने दूरदर्शिता दिखाते हुए सोचा था कि शिकारी तालाब की ओर जरूर भागेंगे, इसलिए उसने पहले ही मगरमच्छों को तालाब के किनारों पर खड़ा कर दिया था।

8. उचित समय पर उचित कार्यवाही (Right Time - Right Action)-


 इधर उधर भागकर जब शिकारी पूरे थक गए, तब शेर ने अपनी सेना को हमला करने का आदेश दिया और शिकारियों को मौत की नींद सुला दिया। शेर को यह ज्ञात था कि इस स्थिति में शिकारी बंदूक नहीं चला पाएंगे।


9. इस कहानी में यह भी है कि शेर अगर चाहता तो मगरमच्छों को तालाब में छिपकर शिकारियों को मारने का आदेश भी दे सकता था, लेकिन अपनी सेना के मनोबल को बढाने के लिए शेर ने शिकारियों को डराने के लिए मगरमच्छों को तालाब के किनारे पर खड़ा किया और अपने शत्रुओं का खत्मा खुद किया

यह कहानी हमको एक Leader के तौर पर लड़ना सिखाती है। इस कहानी को आप खुद पढे, समझे। अपने बच्चों, विद्यार्थियों, छोटे भाई बहनों को यह कहानी सुनाए और उन्हें Leadership की विशेषताओं का ज्ञान कराएं।

तो दोस्तों कैसी लगी ये Story!!! है ना वास्तव में Inspirational और Helpful! Inspirational Articles, Poems and Quotes के साथ साथ ऐसी ही Inspirational Stories मैं आपके लिए लाता रहूंगा। बस अपने Valuable Comments के माध्यम से मुझे जरूर बताईएगा कि यह पोस्ट आपकों कैसी लगी? मुझे इंतजार रहेगा........

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Wednesday, 27 July 2016

एक कविता जो हमेशा हौसला देगी / Inspirational Poem

दोस्तों Poems में अद्भुत शक्ति होती है। जो काम एक Book नहीं करती वह काम महज एक कविता कर देती है। यूं तो हिन्दी साहित्य (Hindi Literature) काफी समृद्ध है, उसकी परम्परा, रीति, सौंदर्य, शास्त्र बहुत पुराना है।

इसी कड़ी में पहले हमने डाॅ. कुमार विश्वास की कुछ प्रेरणादायक शायरियां पढी थी, अब मैं आपके लिए एक ऐसी कविता लाया हूं जो हमेशा हौसला देगी, जो मुर्दे में भी जान डालने वाली ताकत रखती है।

इसकी हर एक पंक्ति, हर एक शब्द और उसके पीछें छुपे भाव को एक बार मन में सोचे तो आप पाएंगे कि कविता को पढने से पहले आप कुछ और थे और बाद में कुछ और।

यह कविता सदी के महानतम कवियों में से एक पद्म भूषण श्री गोपालदास नीरज की कविता है।

Inspirational Quotes
Gopal Das Neeraj
नाम - गोपाल दास ‘नीरज‘

(Wikipedia - Gopal Das Neeraj)

जन्मकाल- 4 जनवरी 1925 से अब तक (जीवित)

ग्राम- पुरावली, इटावा, उत्तरप्रदेश।

विशेष- गत 50 वर्षों से काव्य मंचों पर सक्रिय कविता पाठ। नीरज 20th सदी के प्रसिद्ध और सफलतम मंचीय कवियों में से एक माने जाते है।
बाॅलीवुड के कई शानदार नगमें गोपाल दास नीरज की देन है। इनमें कारवां गुजर गया, लिखे जो खत तुझे, ए भाई जरा देख के चलो, यही अपराध हर बार करता हूं, काल का पहिया घूमे रे भईया काफी लोकप्रिय नगमें है। नीरज की 15 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है।

पुरस्कार- गोपालदास नीरज को पद्मश्री, पद्मभूषण, यशभारती समेत कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हो चुके है।


तो आईए आपको ज्यादा इंतजार न करवाते हुए उस कविता का दीदार करवाते है। इस कविता का शीर्षक है -

छिप छिप अश्रु बहाने वालों


छिप-छिप अश्रु बहाने वालों!
मोती व्यर्थ लुटाने वालों!
कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है।

सपना क्या है? नयन सेज पर,
सोया हुआ आँख का पानी,
और टूटना है उसका ज्यों,
जागे कच्ची नींद जवानी,
गीली उमर बनाने वालों! डूबे बिना नहाने वालों!
कुछ पानी के बह जाने से सावन नहीं मरा करता है।

माला बिखर गई तो क्या है,
खुद ही हल हो गई समस्या,
आँसू गर नीलाम हुए तो,
समझो पूरी हुई तपस्या,
रूठे दिवस मनाने वालों! फटी क़मीज़ सिलाने वालों!
कुछ दीपों के बुझ जाने से आँगन नहीं मरा करता है।

खोता कुछ भी नहीं यहाँ पर,
केवल जिल्द बदलती पोथी।
जैसे रात उतार चाँदनी,
पहने सुबह धूप की धोती,
वस्त्र बदलकर आने वालों! चाल बदलकर जाने वालों!
चंद खिलौनों के खोने से बचपन नहीं मरा करता है।

लाखों बार गगरियाँ फूटीं,
शिकन न आई पनघट पर,
लाखों बार कश्तियाँ डूबीं,
चहल-पहल वो ही है तट पर,
तम की उमर बढ़ाने वालों! लौ की आयु घटाने वालों!
लाख करे पतझर कोशिश पर उपवन नहीं मरा करता है।

लूट लिया माली ने उपवन,
लुटी न लेकिन गंध फूल की,
तूफ़ानों तक ने छेड़ा पर,
खिड़की बन्द न हुई धूल की,
नफ़रत गले लगाने वालों! सब पर धूल उड़ाने वालों!
कुछ मुखड़ों की नाराज़ी से दर्पन नहीं मरा करता है! - श्री गोपालदास नीरज Shree Gopal Das Neeraj


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Wednesday, 27 January 2016

शत्रु का भय! Prernadayak Hindi Kahani

Inspirational Hindi Story


प्राचीन भारत की बात है, एक समय राजा का दरबार लगा था। तभी दरबार में राजकवि ने प्रवेश किया। राजकवि का आगमन होते ही पूरा दरबार उनके सम्मान में खड़ा हुआ, राजा ने राजकवि को प्रणाम करते हुए उनका स्वागत किया। 
भरे दरबार में राजकवि ने राजा को आशीर्वाद देते हुए उनसे कहा, ''आपके शत्रु चिरंजीव हो।''

इतना सुनते ही पूरी सभा दंग रह गई। यह विचित्र सा आशीर्वाद सुनकर राजा भी राजकवि से नाराज हो गए, पर उन्होंने अपने क्रोध पर नियंत्रण कर लिया।
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इस बात को वहां उपस्थित सभी लोगों ने भांप लिया। वहां कई दरबारी ऐसे भी थे, जो राजकवि की प्रतिभा, रूतबे और व्यक्तित्व से जलते थे। वे मन ही मन प्रसन्न हो गए कि अब राजकवि राजा की नजरों से गिर जाएंगे और उनका महत्व कम हो जाएगा। हो सकता है वे राजा द्वारा दंडित भी किये जाए। 

राजकवि ने भी इस बात को ताड़ लिया कि राजा उनकी बात सुनकर नाराज हो गए है। उन्होंने तुरंत कहा, ''महाराज क्षमा करें। मैनें आपको कुछ दिया, पर आपने लिया नहीं।'' 

राज ने पूछा, ''कौन सी चीज? ''

राजकवि बोले, ''मैने आपको आशीर्वाद दिया पर आपने लिया नहीं।'' 

राजा ने कहा, ''कैसे लूं मैं आपका आशीर्वाद? आप मेरे शत्रुओं को मंगलकामना दे रहे है।'' 

इस पर राजकवि ने समझाया, ''राजन! मैनें यह आशीर्वाद देकर आपका हित ही चाहा है। आपके शत्रु जीवित रहेंगे, तो आप में बल, बुद्धि, पराक्रम और सावधानी बनी रहेगी।
यह बात आवश्यक है कि राजा को सदा सावधान रहना चाहिए। सावधानी तभी बनी रह सकती है, जब शत्रु का भय हो। शत्रु का भय होने पर ही होशियारी आती है। उसके न रहने पर हम निश्चिंत और असावधान हो जाते है। 
इस प्रकार, हे राजन! मैनें आपको शत्रुओं को नहीं, आपको ही मंगलकामना दी है।''

राजकवि के आशीर्वाद का मर्म जानकर राजा ने राजकवि से क्षमा मांग ली और उनके आशीर्वाद को स्वीकार किया।


तो दोस्तों यह कहानी हमे बहुत कुछ सीखा जाती है। वह बात जो हमे समझनी चाहिए। 

जिस प्रकार शत्रु का भय होने पर ही राजा सावधान और वीर बना रह सकता है, उसी प्रकार हमारे जीवन में भी मुश्किल परिस्थितियां और संकट होने पर ही हम कुछ बन पाते है। 
अगर हमें किसी प्रकार का कष्ट, परेशानी या संकट नहीं होगा तो तय है कि हम निश्चिंत जीवन जिएंगे और परिस्थितियों को जस की तस स्वीकार कर लेंगे। 

लेकिन अगर हमें संकट, परेशानी हो या उनका भय हो तब ही हम कुछ नया कर पाते है, कुछ नया सीख पाते है, नई बुलंदियां और सफलता को प्राप्त कर पाते है। 

हमारे जीवन में कोई संकट या समस्या आती है तो राजा की तरह अपने राजकवि (भगवान) को कोसे नहीं, उनसे नाराज मत होइए बल्कि उनका धन्यवाद कीजिए कि भगवान ने हमें अपने आप को साबित करने का एक और अवसर प्रदान किया है। 
समस्याओं से घबराने और डरने की बजाय आगे बढकर उन्हें स्वीकार करने का प्रयास करना चाहिए ताकि उसका नया समाधान प्रस्तुत कर सके और जीवन में नई बुलंदियों और उन्नतियों के दरवाजे अपने लिए खोल सके।
Yaad rakhe -      संकट और परेशानी की भट्टी में तपकर ही इंसान सोना बनकर निकलता है।

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Monday, 25 January 2016

आइजक न्यूटन के अनमोल प्रेरणादायक विचार

Issac Newton Inspirational Quotes in Hindi


सर आइजक न्यूटन (Issac Newton) के बारे में कौन नहीं जानता? गुरूत्वाकर्षण (Universal Gravitation) जैसे सर्वकालिक महान नियम को पूरी दुनिया को बताने वाले आइजक न्यूटन ने गति के तीन नियम (Newton's law of motion) भी प्रतिपादित किये। न्यूटन एक Great Scientist, Philosopher और Spiritual व्यक्ति थे। न्यूटन के ऐसे ही दार्शनिक और प्रेरणादायक कथन आपके लिए प्रस्तुत है-

Vichar Prerna BlogName- Issac Newton / आइजक न्यूटन

Born- 25 December 1642

Die- 20 March 1727

Nationality- English

Known For- Newtonian mechanics,Universal gravitation, Calculus, Newton's laws of motion, Optics Binomial series, Principia, Newton's method.

(Know more about Issac Newton)


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Issac Newton Inspirational Quotes in Hindi
आइजक न्यूटन के अनमोल प्रेरणादायक विचार

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1. We build too many walls and not enough bridges.

Quotes in Hindi- हमने बहुत सारी तो दीवारे बनाई, लेकिन पर्याप्त पुल नहीं बनाएं।
- Issac Newton आइजक न्यूटन

2. To every action there is always opposed an equal reaction.

Quotes in Hindi- हर एक क्रिया की प्रतिक्रिया होती है।
- Issac Newton आइजक न्यूटन

3. What goes up must come down.

Quotes in Hindi- जो उपर जाता है उसका नीचे आना भी अवश्यंभावी है।
- Issac Newton आइजक न्यूटन

4. My powers are ordinary. Only my application brings me success.

Quotes in Hindi- मेरी शक्तियां साधारण है, सिर्फ मेरे प्रयोगों ने मुझे सफलता दिलाई है।
- Issac Newton आइजक न्यूटन

5. genius is patience.

Quotes in Hindi- प्रतिभा धैर्य है।
- Issac Newton आइजक न्यूटन

6. I can calculate the motion of heavenly bodies, but not the madness of people.

Quotes in Hindi- मैं आकाशीय पिंडों की गति की गणना कर सकता हूं लेकिन लोगों के पागलपन की नहीं।
- Issac Newton आइजक न्यूटन

7. Error are not in the art but in the artificers.

Quotes in Hindi- दोष कला कृतियों में नहीं होता बल्कि कलाकार में होता है।
- Issac Newton आइजक न्यूटन

8. An object in motion tends to remain in motion along a straight line unless acted upon by an outside force.

Quotes in Hindi- कोई भी चीज सीधी दिशा में तब तक गतिमान रहती है जब तक कि उस पर कोई बाहरी बल न लग जाए।
- Issac Newton आइजक न्यूटन

9. Truth is ever to be found in simplicity, and not in the multiplicity and confusion of things.

Quotes in Hindi- सत्य हमेशा सादगी में पाया जाता है न कि बहुत चीजों और भ्रम की स्थिति में।
- Issac Newton आइजक न्यूटन

10. Tact is the art of making a point without making an enemy.

Quotes in Hindi- चतुरता बिना शत्रु बनाएं, अपना लक्ष्य बना लेने की कला है
- Issac Newton आइजक न्यूटन

11. Plato is my friend; Aristotle is my friend, but my greatest friend is truth.

Quotes in Hindi- प्लेटों मेरा मित्र है, अरस्तू मेरा मित्र है लेकिन मेरा सबसे बड़ा मित्र सत्य है।
- Issac Newton आइजक न्यूटन

12. If I have done the public any service, it is due to my patient thought.

Quotes in Hindi- यदि मैनें जनता की कोई सेवा की है तो केवल अपने संतोषी विचारों की वजह से।
- Issac Newton आइजक न्यूटन

13. To me there has never been a higher source of earthly honor or distinction than that connected with advances in science.

Quotes in Hindi- मेरे लिए भौतिक सम्मान और गौरव के साधन कभी भी विज्ञान के क्षेत्र में प्रगति से अधिक नहीं रहे।
- Issac Newton आइजक न्यूटन

14. To every action there is always opposed an equal reaction, or, the mutual actions of two bodies upon each other are always equal, and directed to contrary parts.

Quotes in Hindi- हर एक क्रिया की प्रतिक्रिया होती है या दो वस्तुओं के बीच परस्पर क्रियाएं हमेशा बराबर होती है और उनका बल विपरीत दिशा में होता है।
- Issac Newton आइजक न्यूटन

15. I do not know what I may appear to the world, but to myself I seem to have been only like a boy playing on the seashore, and diverting myself in now and then finding a smoother pebble or a prettier shell than ordinary, whilst the great ocean of truth lay all undiscovered before me.

Quotes in Hindi- मैं नहीं जानता कि संसार के लिए मैं क्या हूं, लेकिन मेरी नजर में, मैं अपने आप को समुद्र के किनारे खेल रहे उस बच्चे की तरह मानता हूं जो चिकने पत्थर एंव सुंदर सीपियां खोजने में लीन है। जबकि सामने सत्य का अबूझ अनसुलझा महासागर अब भी फैला हुआ है।
- Issac Newton आइजक न्यूटन

16. My powers are very simple. No other power of secret of my success, continuous practice.

Quotes in Hindi- मेरी शक्तियां बहुत साधारण है, मेरी सफलता का राज है- सतत अभ्यास।
- Issac Newton आइजक न्यूटन

17. To explain all nature is too difficult a task for any one man or even for any one age. It’s much better to do a little with certainty & leave the rest for others that come after you.

Quotes in Hindi- किसी एक आदमी यहां तक कि किसी एक उम्र के लिए पूरी प्रकृति की व्याख्या करना बहुत कठिन कार्य है, इसलिए बेहतर है कि जो कुछ हो निश्चितता के साथ किया जाए और शेष उनके लिए छोड़ दिया जाए जो आपके बाद आएंगे।
- Issac Newton आइजक न्यूटन

18. If I have seen further than others, it is by standing upon the shoulders of giants.

Quotes in Hindi- यदि मैने दूसरों की तुलना में आगे देखा है तो यह सब मैं दिग्गजों के कंधे पर खड़े रहकर ही कर पाया हूं।
- Issac Newton आइजक न्यूटन

19. I have made myself so by hard work.

Quotes in Hindi- मैनें अपने आप को कड़ी मेहनत के बाद ऐसा बनाया है।
- Issac Newton आइजक न्यूटन

20. No great discovery was ever made without a bold guess.

Quotes in Hindi- कोई भी बड़ी खोज, एक साहसी कल्पना के बिना नहीं की जा सकती।
- Issac Newton आइजक न्यूटन

Note- There is may be some mistakes in language, because it is a work of translation from English to Hindi and Vice versa.

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Friday, 22 January 2016

दूसरों का ख्याल रखों - वह आपका हो जाएगा

Personality Development Article in Hindi


मैं Jodhpur में दो वर्षों तक रहा, उस समय मैं B. Sc. Bio Tech की पढाई कर रहा था (हालांकि मैंने इसे पूरा नहीं किया)। रहने के नाम पर कमला नेहरू नगर में मेरे पास Rent पर एक Room था।

जिस गली में मैं रहता था उसी के नुक्कड़ पर कबूतरों के लिए एक चौक  बना हुआ था। College जाते वक्त मैं हमेशा देखा करता था कि एक बुजुर्ग, जिनकी उम्र कोई 75 वर्ष रही होगी, उस चौक पर कबूतरों कों दाना देते थे।मैं बड़े इत्मीनान से यह Notice करता था कि वे बुजुर्ग उस चौक में घूम घूम कर कबूतरों को दाना देते थे और कबूतर बिल्कुल Fear Free होकर दाना चुगते रहते थे। रोज रोज यह देखकर मुझे उनसे मिलने की बड़ी इच्छा हुई। 
एक दिन उनसे मिलने के लिए मैं उस चौक में पहुंच गया और मेरे पहुंचते ही सारे के सारे कबूतर उड़ गए!!! अब उस चौक में हम दोनों ही बचे थे।
मैंनें उन बुजुर्ग से पूछा कि ”बाबूजी! यह कबूतर आपसे डरते नहीं क्या?“

वे थोड़ा मुस्कुराए और बोले 'नहीं! यह मुझसे क्यों डरेंगे। मैं पिछले 15 सालों से इन कबूतरों को दाना डाल रहा हूं, अब मैं इनके लिए परीचित हो गया हूं। '

मैने कहा 'अच्छा! इसलिए कबूतरों को आपसे डर नहीं लगता।'

वे बोले 'सिर्फ यहीं बात नहीं है कि मैं इतने सालों से इनकों दाना डाल रहा हूं। बल्कि मैं इनके लिए पानी के छोटे छोटे कुंडे भी भरता हूं, कोई कबूतर घायल होता है तो उसके मरहम भी लगा देता हूं और Morning के Time जब तक कबूतर दाना चुगते रहते है, मैं इनकी कुत्तों से रखवाली भी करता हूं। बस यही सब देखकर कबूतरों को मुझ पर विश्वास हो गया है, और वे मुझसे डरते नहीं है। कभी कभार अगर मैं नहीं आ पाता हूं तो कोई भी कबूतर दाना चुगने के लिए नहीं आता है।'

मैं उन बुजुर्ग की बात सुनकर बड़ा हैरान था। यकीन नहीं हो रहा था कि बेजुबान पक्षी प्यार की परिभाषा समझते है।

एक कथा मैंने महाभारत के विषय में भी सुनी है-

एक बार द्वारिका में बाहर के राज्य से एक राजा और उनके परिवार के सदस्य आए। मेहमानों के आगमन की खबर सुनकर उनकी अगवानी के लिए बलराम और श्रीकृष्ण दौड़े दौड़े द्वार की तरफ गए।

द्वार पर पहुंचते ही बलराम देखते है कि श्रीकृष्ण मुख्य अतिथियों के पास नहीं जाकर उनके साथ आए रथ के सारथियों और सेवकों की तरफ बढ जाते है।

उस समय तो बलराम ने मुख्य अतिथियों का स्वागत अकेले ही किया , लेकिन जब कुछ देर पश्चात् श्रीकृष्ण महल में लौटते है तो बलराम उनसे एक प्रश्न करते है 'कृष्ण! तुम ऐसा कैसे कर सकते हो? द्वार पर इतने मुख्य अतिथि आए थे और तुम उन्हें छोड़कर साथ आए सारथियों और सेवकों की तरफ बढ गए। वहां क्या करने गए थे, उनका ख्याल तो हमारे सेवक रख सकते थे?'

श्रीकृष्ण मुस्कुराकर बोले 'बलराम भैया क्या आपके लिए सिर्फ वे ही अतिथि थे? मेरे लिए तो उनके साथ आए सारथी, सेवक और घोड़े भी अतिथि थे। राजशाही अतिथियों की अगवानी तो कोई भी कर सकता था, पर मुझे चिंता उनके सेवकों की थी। मैं व्यक्तिगत रूप से हर सारथी और सेवक से मिलकर आ रहा हूं और साथ ही साथ उनके और अश्वों के रहने, खाने का प्रबंध भी करके ही लौटा हूं।'

श्रीकृष्ण की बात सुनकर बलराम बोले 'धन्य हो तुम कृष्ण। हर कोई तुमसे इतना प्यार इसीलिए करता है क्योंकि तुम हर एक की चिंता करते हो, हर एक का ख्याल रखते हो।'


ऐसी ही एक घटना Jaisalmer की है। जहां मैं 2011 में था। 
मेरे Quarter के ही पास पहले एक पति पत्नी रहते थे। पति तो दिन में Office जाते थे। पत्नी और बच्चे दिन में घर पर अकेले रहते थे। उन्होंने एक गाय पाल रखी थी, जो उनके Quarter के पास ही बैठी रहती । Quarter की चार दीवार चारों तरफ से टूटी हुई है, इसलिए हर कोई Colony में आसानी से Enter कर सकता है।

एक दिन दोपहर के समय वह महिला अपने घर के बाहर खड़े नीम के नीचे बैठी थी तभी अचानक एक पागल कुत्ते ने उस पर हमला कर दिया और अपना जबड़ा उस महिला के पैर में फंसा दिया। महिला भय और दर्द के मारे जोर से चिल्लाई।

गर्मियों का समय था, दोपहर में कूलर, T.V. या पंखे की आवाज से कोई उनकी चीख सुन नहीं पाया। लेकिन उस औरत की चीख दूर खड़ी गाय के कानों में पड़ गई। चीख सुनते ही वो दौड़ती हुई आयी और अपने सींग से एक जोरदार वार उस कुत्तें पर कर दिया। अचानक वार से कुत्ते ने घबराकर उस महिला को तो छोड़ दिया लेकिन एक बार फिर वह उस औरत पर हमला करने के लिए गुर्राया। तब गाय ने उस औरत की रक्षा के लिए क्या तरीका अपनाया? आप सोच सकते है?

औरत को चोट लगने की वजह से वह उठ नहीं पा रही थी, वह जमीन पर ही लेटी रही। गाय उस औरत के उपर जाकर खड़ी हो गई और अपने सींग हिलाकर उस कुत्ते को तब तक महिला से दूर रखा जब तक कि उसके बच्चे आवाज सुनकर घर से बाहर नहीं आ गए।

यह सब क्यो हुआ? 
क्योंकि वह महिला हर सुबह गाय को चारा पानी देती थी। सर्दियों में उसे सर्दी से बचाने के लिए कम्बल ओढाती थी. उसे नहलाती भी थी। गाय ने उसके प्यार को देखा ही नहीं था महसूस भी किया था।

आप स्वंय सोचे कि अगर हम किसी Marriage Ceremony में जाए और हमें देखकर भी समारोह का Host स्वागत करने नहीं आये तो कैसा लगता है? आप सिटी बस में है और कंडक्टर आपसे बदतमीजी से बात कर रहा है, आपकों अच्छा लगेगा? आपके घर के आगे दो Auto वाले खड़े है एक आपकों रोज नमस्कार करता है, आपकों देखकर मुस्कुराता है, आपका सम्मान करता है और दूसरा आए दिन आस पड़ोस में झगड़ा करता है, शराब पीता है, तू तड़ाक से बात करता है, तो आप ही बताए आप किस की Auto में बैठना ज्यादा पसंद करेंगे। Of course पहले वाले आदमी की टैक्सी में! चाहे वह दूसरे वाले से दस रूपये ज्यादा किराया लेता हेा।

मैं अपने काॅलेज दिनों में मेरे रूम के पास ही रूम लेकर रहने वाले College senior and Friend  अनूपसिंह को नहीं भूलना चाहूंगा, उसके लिए मेरे मन में हमेशा प्रेम और सम्मान रहेगा।

क्यों?
क्योंकि मुझे अब भी याद है जब कभी वह खाना खा रहा होता और मुझे देख लेता तो वह अपने साथ बिठाकर मुझे खाना जरूर खिलाता। यह जानते हुए भी कि थाली में चार रोटियां ही है, पांचवी रोटी नहीं आएगी। कई बार मैं मना करता, कई बार दिखावे के लिए, कई बार असल में, लेकिन हर बार वह इतना जोर देता कि मुझे उसके साथ खाना ही पड़ता। आज वह कहीं और है, मैं कहीं और हूं। लेकिन उसकी अच्छाई मैं अब तक नहीं भूला हूं।

एक माली या Gardner का प्रेम पेड़ और पौधे भी समझते है। पालतू पशु आपकी हर बात को समझ सकते है। आप अपने Office में कौनसे colleague को पसंद करते है, किसके प्रति आप में Respect का भाव है। Once again!! of course उस के प्रति आपके मन में Respect की भावना होगी जो आपका ख्याल रखता है, आपकी Respect करता है, आपका काम अटक जाता है तो आपकी Help करता है। आपके Relatives, Friends आपकों इसलिए पसंद करते है क्योंकि आप उनकी Care करते है। 

सार यही है कि दूसरों को अपना बनाने का कोई वशीकरण मंत्र नहीं है, सिर्फ एक ही तरीका है उनकी चिंता करे, उनका ख्याल रखे। यकीन न हो तो Try कीजिए अपने आस पास के रहने वाले लोगों की चिंता करके देखिए, उनका ख्याल रखके देखिये। यह देखा हुआ और परखा हुआ तरीका है।

Written By- Ram Lakhara

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Ok Friends!!! Good Bye and Take Care.

Friends लगभग 1500 Words के इस आर्टिकल को लिखने में मैने बहुत Time खर्च किया है और काफी मेहनत भी की है So Comment के माध्यम से जरूर बताए कि आपकों यह Article कैसा लगा?
मुझे इंतजार रहेगा !!!
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