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Friday, 22 January 2016

दूसरों का ख्याल रखों - वह आपका हो जाएगा

Personality Development Article in Hindi


मैं Jodhpur में दो वर्षों तक रहा, उस समय मैं B. Sc. Bio Tech की पढाई कर रहा था (हालांकि मैंने इसे पूरा नहीं किया)। रहने के नाम पर कमला नेहरू नगर में मेरे पास Rent पर एक Room था।

जिस गली में मैं रहता था उसी के नुक्कड़ पर कबूतरों के लिए एक चौक  बना हुआ था। College जाते वक्त मैं हमेशा देखा करता था कि एक बुजुर्ग, जिनकी उम्र कोई 75 वर्ष रही होगी, उस चौक पर कबूतरों कों दाना देते थे।मैं बड़े इत्मीनान से यह Notice करता था कि वे बुजुर्ग उस चौक में घूम घूम कर कबूतरों को दाना देते थे और कबूतर बिल्कुल Fear Free होकर दाना चुगते रहते थे। रोज रोज यह देखकर मुझे उनसे मिलने की बड़ी इच्छा हुई। 
एक दिन उनसे मिलने के लिए मैं उस चौक में पहुंच गया और मेरे पहुंचते ही सारे के सारे कबूतर उड़ गए!!! अब उस चौक में हम दोनों ही बचे थे।
मैंनें उन बुजुर्ग से पूछा कि ”बाबूजी! यह कबूतर आपसे डरते नहीं क्या?“

वे थोड़ा मुस्कुराए और बोले 'नहीं! यह मुझसे क्यों डरेंगे। मैं पिछले 15 सालों से इन कबूतरों को दाना डाल रहा हूं, अब मैं इनके लिए परीचित हो गया हूं। '

मैने कहा 'अच्छा! इसलिए कबूतरों को आपसे डर नहीं लगता।'

वे बोले 'सिर्फ यहीं बात नहीं है कि मैं इतने सालों से इनकों दाना डाल रहा हूं। बल्कि मैं इनके लिए पानी के छोटे छोटे कुंडे भी भरता हूं, कोई कबूतर घायल होता है तो उसके मरहम भी लगा देता हूं और Morning के Time जब तक कबूतर दाना चुगते रहते है, मैं इनकी कुत्तों से रखवाली भी करता हूं। बस यही सब देखकर कबूतरों को मुझ पर विश्वास हो गया है, और वे मुझसे डरते नहीं है। कभी कभार अगर मैं नहीं आ पाता हूं तो कोई भी कबूतर दाना चुगने के लिए नहीं आता है।'

मैं उन बुजुर्ग की बात सुनकर बड़ा हैरान था। यकीन नहीं हो रहा था कि बेजुबान पक्षी प्यार की परिभाषा समझते है।

एक कथा मैंने महाभारत के विषय में भी सुनी है-

एक बार द्वारिका में बाहर के राज्य से एक राजा और उनके परिवार के सदस्य आए। मेहमानों के आगमन की खबर सुनकर उनकी अगवानी के लिए बलराम और श्रीकृष्ण दौड़े दौड़े द्वार की तरफ गए।

द्वार पर पहुंचते ही बलराम देखते है कि श्रीकृष्ण मुख्य अतिथियों के पास नहीं जाकर उनके साथ आए रथ के सारथियों और सेवकों की तरफ बढ जाते है।

उस समय तो बलराम ने मुख्य अतिथियों का स्वागत अकेले ही किया , लेकिन जब कुछ देर पश्चात् श्रीकृष्ण महल में लौटते है तो बलराम उनसे एक प्रश्न करते है 'कृष्ण! तुम ऐसा कैसे कर सकते हो? द्वार पर इतने मुख्य अतिथि आए थे और तुम उन्हें छोड़कर साथ आए सारथियों और सेवकों की तरफ बढ गए। वहां क्या करने गए थे, उनका ख्याल तो हमारे सेवक रख सकते थे?'

श्रीकृष्ण मुस्कुराकर बोले 'बलराम भैया क्या आपके लिए सिर्फ वे ही अतिथि थे? मेरे लिए तो उनके साथ आए सारथी, सेवक और घोड़े भी अतिथि थे। राजशाही अतिथियों की अगवानी तो कोई भी कर सकता था, पर मुझे चिंता उनके सेवकों की थी। मैं व्यक्तिगत रूप से हर सारथी और सेवक से मिलकर आ रहा हूं और साथ ही साथ उनके और अश्वों के रहने, खाने का प्रबंध भी करके ही लौटा हूं।'

श्रीकृष्ण की बात सुनकर बलराम बोले 'धन्य हो तुम कृष्ण। हर कोई तुमसे इतना प्यार इसीलिए करता है क्योंकि तुम हर एक की चिंता करते हो, हर एक का ख्याल रखते हो।'


ऐसी ही एक घटना Jaisalmer की है। जहां मैं 2011 में था। 
मेरे Quarter के ही पास पहले एक पति पत्नी रहते थे। पति तो दिन में Office जाते थे। पत्नी और बच्चे दिन में घर पर अकेले रहते थे। उन्होंने एक गाय पाल रखी थी, जो उनके Quarter के पास ही बैठी रहती । Quarter की चार दीवार चारों तरफ से टूटी हुई है, इसलिए हर कोई Colony में आसानी से Enter कर सकता है।

एक दिन दोपहर के समय वह महिला अपने घर के बाहर खड़े नीम के नीचे बैठी थी तभी अचानक एक पागल कुत्ते ने उस पर हमला कर दिया और अपना जबड़ा उस महिला के पैर में फंसा दिया। महिला भय और दर्द के मारे जोर से चिल्लाई।

गर्मियों का समय था, दोपहर में कूलर, T.V. या पंखे की आवाज से कोई उनकी चीख सुन नहीं पाया। लेकिन उस औरत की चीख दूर खड़ी गाय के कानों में पड़ गई। चीख सुनते ही वो दौड़ती हुई आयी और अपने सींग से एक जोरदार वार उस कुत्तें पर कर दिया। अचानक वार से कुत्ते ने घबराकर उस महिला को तो छोड़ दिया लेकिन एक बार फिर वह उस औरत पर हमला करने के लिए गुर्राया। तब गाय ने उस औरत की रक्षा के लिए क्या तरीका अपनाया? आप सोच सकते है?

औरत को चोट लगने की वजह से वह उठ नहीं पा रही थी, वह जमीन पर ही लेटी रही। गाय उस औरत के उपर जाकर खड़ी हो गई और अपने सींग हिलाकर उस कुत्ते को तब तक महिला से दूर रखा जब तक कि उसके बच्चे आवाज सुनकर घर से बाहर नहीं आ गए।

यह सब क्यो हुआ? 
क्योंकि वह महिला हर सुबह गाय को चारा पानी देती थी। सर्दियों में उसे सर्दी से बचाने के लिए कम्बल ओढाती थी. उसे नहलाती भी थी। गाय ने उसके प्यार को देखा ही नहीं था महसूस भी किया था।

आप स्वंय सोचे कि अगर हम किसी Marriage Ceremony में जाए और हमें देखकर भी समारोह का Host स्वागत करने नहीं आये तो कैसा लगता है? आप सिटी बस में है और कंडक्टर आपसे बदतमीजी से बात कर रहा है, आपकों अच्छा लगेगा? आपके घर के आगे दो Auto वाले खड़े है एक आपकों रोज नमस्कार करता है, आपकों देखकर मुस्कुराता है, आपका सम्मान करता है और दूसरा आए दिन आस पड़ोस में झगड़ा करता है, शराब पीता है, तू तड़ाक से बात करता है, तो आप ही बताए आप किस की Auto में बैठना ज्यादा पसंद करेंगे। Of course पहले वाले आदमी की टैक्सी में! चाहे वह दूसरे वाले से दस रूपये ज्यादा किराया लेता हेा।

मैं अपने काॅलेज दिनों में मेरे रूम के पास ही रूम लेकर रहने वाले College senior and Friend  अनूपसिंह को नहीं भूलना चाहूंगा, उसके लिए मेरे मन में हमेशा प्रेम और सम्मान रहेगा।

क्यों?
क्योंकि मुझे अब भी याद है जब कभी वह खाना खा रहा होता और मुझे देख लेता तो वह अपने साथ बिठाकर मुझे खाना जरूर खिलाता। यह जानते हुए भी कि थाली में चार रोटियां ही है, पांचवी रोटी नहीं आएगी। कई बार मैं मना करता, कई बार दिखावे के लिए, कई बार असल में, लेकिन हर बार वह इतना जोर देता कि मुझे उसके साथ खाना ही पड़ता। आज वह कहीं और है, मैं कहीं और हूं। लेकिन उसकी अच्छाई मैं अब तक नहीं भूला हूं।

एक माली या Gardner का प्रेम पेड़ और पौधे भी समझते है। पालतू पशु आपकी हर बात को समझ सकते है। आप अपने Office में कौनसे colleague को पसंद करते है, किसके प्रति आप में Respect का भाव है। Once again!! of course उस के प्रति आपके मन में Respect की भावना होगी जो आपका ख्याल रखता है, आपकी Respect करता है, आपका काम अटक जाता है तो आपकी Help करता है। आपके Relatives, Friends आपकों इसलिए पसंद करते है क्योंकि आप उनकी Care करते है। 

सार यही है कि दूसरों को अपना बनाने का कोई वशीकरण मंत्र नहीं है, सिर्फ एक ही तरीका है उनकी चिंता करे, उनका ख्याल रखे। यकीन न हो तो Try कीजिए अपने आस पास के रहने वाले लोगों की चिंता करके देखिए, उनका ख्याल रखके देखिये। यह देखा हुआ और परखा हुआ तरीका है।

Written By- Ram Lakhara

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Ok Friends!!! Good Bye and Take Care.

Friends लगभग 1500 Words के इस आर्टिकल को लिखने में मैने बहुत Time खर्च किया है और काफी मेहनत भी की है So Comment के माध्यम से जरूर बताए कि आपकों यह Article कैसा लगा?
मुझे इंतजार रहेगा !!!
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2 comments:

  1. Bahut khoob aur sundar lekh. bahut achcha likha hai ram ji.

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